करीब-करीब तीन महीने पहले न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट आई थी। इसमें चीनी सरकार की एक इंटरनल रिपोर्ट के हवाले से बताया गया था कि दुनियाभर में एंटी-चाइना सेंटीमेंट्स 1989 में थियानमेन चौक पर हुए नरसंहार के बाद सबसे ज्यादा है। इसका कारण था कोरोनावायरस।
कोरोनावायरस की वजह से चीन में तो कुछ खास नुकसान नहीं हुआ, लेकिन भारत समेत दुनिया के कई देशों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा है। कुछ हफ्ते पहले ही चीन के वुहान से तस्वीरें आईं थीं, जिसमें लोग पूल पार्टी करते नजर आ रहे थे।
एक तरफ दुनिया में पिछले 7 महीनों से लोग पार्टी तो दूर, अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से भी नहीं मिल पा रहे हैं, दूसरी तरफ जिस चीन के वुहान से कोरोना शुरू हुआ, वहां अब पार्टियां होने लगीं हैं। वो भी हजारों लोगों की भीड़ के साथ।
हो सकता है कि इन पार्टीज की फोटो देखकर चीन को लेकर आपकी चिढ़ और बढ़ गई हो, लेकिन एक कारण और है, जो एंटी-चाइना सेंटीमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए काफी है और वो है जीडीपी के आंकड़े।
इस साल की जून तिमाही में भारत की जीडीपी में 23.9% की गिरावट आई है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों की जीडीपी भी अप्रैल से जून तिमाही में गिर गई। लेकिन, सिर्फ चीन ही ऐसा देश है, जिसकी जीडीपी इस तिमाही में बढ़ी है।
चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, अप्रैल से जून तिमाही के बीच चीन की जीडीपी में 3.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि, इससे पहले जनवरी से मार्च तिमाही में चीन की जीडीपी 1992 के बाद पहली बार गिरी थी। इस तिमाही में 6.8% की गिरावट आई थी।

आखिर इसका कारण क्या है? इस पर क्रिसिल के चीफ इकनॉमिस्ट डीके जोशी दो बड़े कारण गिनाते हैं। पहला तो ये कि चीन में कोरोनावायरस को रोकने के लिए टोटल लॉकडाउन नहीं लगा और दूसरा कि वहां कोरोना पर जल्द ही काबू पा लिया गया।
चीन की जीडीपी बढ़ने के दो बड़े कारण
पहला : टोटल लॉकडाउन नहीं लगाया
दुनियाभर में कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए टोटल लॉकडाउन लगाया गया। लेकिन, जिस चीन से ये सब निकला, वहां टोटल लॉकडाउन लगा ही नहीं। वुहान में पहला केस आने के 7 हफ्ते बाद सिर्फ वहां ही लॉकडाउन लगाया गया। 76 दिन बाद 8 अप्रैल को वुहान से लॉकडाउन हटा दिया।
चीन में सिर्फ उन्हीं इलाकों में लॉकडाउन लगा, जहां कोरोना के मरीज मिल रहे थे। मसलन, जिस इलाके में एक भी कोरोना का मरीज मिलता, तो उसे पूरी तरह लॉकडाउन कर वहां के हर नागरिक का कोरोना टेस्ट किया जाता।
दूसरा : कोरोना काबू में, जून तिमाही में 2 हजार से भी कम मामले आए
चीन में कोरोना की शुरुआत पिछले साल दिसंबर के आखिर में हो गई थी। उसके बाद जनवरी और फरवरी में यहां हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। 31 मार्च तक वहां 81 हजार से ज्यादा केस आ चुके थे। ये जनवरी से मार्च की तिमाही थी, जिसमें चीन की जीडीपी 6.8% गिर गई थी।
लेकिन, उसके बाद कोरोना संक्रमित नए मरीजों की संख्या कम होती चली गई। अप्रैल से जून तक चीन में सिर्फ 1977 मरीज ही मिले। जबकि, दुनियाभर में कोरोना मार्च से फैलना शुरू हुआ। इसके उलट चीन में इस पर काबू पा लिया गया।

दूसरी तिमाही में चीन का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बढ़ा, मेन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ हुई
दूसरी तिमाही में चीन की जीडीपी में 3.2% की ग्रोथ दर्ज की गई। चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, जून तिमाही में चीन के मेन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 4.4% की ग्रोथ रही, जबकि जनवरी से मार्च तिमाही में इसमें 2.5% की गिरावट आई थी।
इसके अलावा जून तिमाही में चीन के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जनवरी से मार्च तिमाही में चीन का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट 6.5% तक गिर गया था। हालांकि, जून तिमाही में भी इसमें गिरावट आई, लेकिन महज 0.2% की।


भारत में दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन था, इससे जीडीपी गिरी
कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए सबसे पहले 22 मार्च को देश में एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया गया । उसके बाद 25 मार्च से 31 मई के बीच चार बार लॉकडाउन लगा। पहला लॉकडाउन 25 मार्च से 14 अप्रैल के बीच लगा था, जो सबसे सख्त था।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कोविड-19 गवर्नमेंट रिस्पॉन्स ट्रैकर के मुताबिक, भारत में जितना सख्त लॉकडाउन लागू किया गया था, उतनी सख्ती दुनिया के किसी देश ने नहीं दिखाई।
जीडीपी गिरने के पीछे एक्सपर्ट इसे भी एक बड़ी वजह मानते हैं। डीके जोशी कहते हैं कि भारत में सख्त लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद हो गया, जिस वजह से इस तिमाही में जीडीपी गिर गई।
इसके अलावा जून तिमाही में भारत में सिर्फ एग्रीकल्चर सेक्टर ही ऐसा था, जिसमें 3.4% की ग्रोथ रही। बाकी सभी सेक्टर में गिरावट आई। ऐसा इसलिए क्योंकि लॉकडाउन में सबकुछ बंद था।

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