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मंगलवार, 1 सितंबर 2020
दिल्ली में नहीं चलेगी प्राइवेट स्कूल की मनमानी, अब सरकार ने दिए ये आदेश https://ift.tt/2DzNWCZ
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गणपति बप्पा और प्रणब दा के साथ अगस्त की गमगीन विदाई, पितृ पक्ष के साथ अनलॉक की आजादी लिए आया है 2020 का 9वां महीना https://bit.ly/3hYXneR
1 सितंबर, साल का 245वां दिन। भारी मन से गणपति बप्पा की विदाई हो रही है और नम आंखों के साथ प्रणब दा को अलविदा कहना पड़ रहा है। फैसलों से लग रहा है कि ये 9वां महीना कई मायनों में कोरोना काल की लगभग समाप्ति का महीना रहेगा। ऐसे में आज पहले दिन थोड़े से बदले अंदाज के साथ मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ ताकि आपका दिन बेहतर हो और दिमाग स्मार्ट तरीके से सोचे-
आज इन 10 बड़े इवेंट्स और खबरों पर रहेगी नजर
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। गृह नगर प.बंगाल की जगह नई दिल्ली में पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्रणब दा का अंतिम संस्कार होगा।
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देशभर में आज से कोरोना अनलॉक-4 शुरू हो रहा है। इसके तहत सबसे पहले टेकअवे बार खुलेंगे। 7 सितंबर से मेट्रो चलेंगी और 21 से थिएटर खुलने लगेंगे।
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आज से ज्वॉइंट एंट्रेस एग्जाम JEE मेन शुरू हो रही है। तमाम विवादों के बीच इस इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में करीब 10 लाख बच्चे बैठेंगे।
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आज अनंत चर्तुदशी है,और देशभर में 10 दिन के गणेश उत्सव का समापन हो जाएगा। कोरोना संकट के कारण इस बार भव्य विसर्जन पर पाबंदी है।
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आज से वंदे भारत मिशन का छठवां चरण शुरू होगा। कनाडा के टोरंटो, वैंकुवर और चीन के शंघाई से एयर इंडिया की 31 फ्लाइट्स से भारतीय स्वदेश लौटेंगे।
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आज से पुराने दरों के हिसाब से ही EMI चुकानी होगी, क्योंकि मार्च में दी गई छूट खत्म हो गई है। एलपीजी रेट्स रिवाइज होंगे और हवाई यात्रा महंगी हो जाएगी।
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आज से GST के भुगतान में देरी पर कुल टैक्स देनदारी पर 18% ब्याज लगेगा। GST काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया था।
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आज से कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सिल्वर ऑप्शन में ट्रेडिंग की सुविधा लॉन्च की जाएगी।
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आज से विदेशी खिलौने के लिए क्वॉलिटी कंट्रोल स्टैंडर्ड (QCS) लागू होंगे। अब अनिवार्य जांच के बाद ही खिलौनों को भारत में एंट्री मिलेगी।
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आज वेस्पा अपना नया स्कूटर रेसिंग सिस्सटीज लॉन्च करेगी। सैमसंग फोल्डेबल फोन गैलेक्सी Z-फोल्ड 2 और हॉन्गकॉन्ग की टेक्नो स्पार्क गो 2020 उतारेगी।
कल की महत्वपूर्ण खबरें जो आप जानना चाहेंगे -
1. प्रणब दा के साथ एक युग का अंत
पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी हमें छोड़कर चले गए... 84 साल के प्रणब मुखर्जी की हालत 10 अगस्त के बाद से ही गंभीर थी। यूपीए के तारणहार और पीएम मोदी समेत संघ प्रिय प्रणब दा का जाना वाकई एक युग का अंत है। देश में 7 दिन का राष्ट्रीय शोक है और प्रणब दा को अंतिम विदाई के साथ उनकी हर उस बात को याद कर रहे हैं, जो दलों से ज्यादा दिलों को जोड़ती थी।

2. इकॉनमी को 40 साल में सबसे बड़ा झटका
बस इसी खबर का डर कई महीनों से था, जीडीपी के मोर्चे पर भारत को 40 साल में पहली बार इतना बड़ा झटका लगा है ... देश में पहली तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ रेट -23.9% रही है। भारत की अर्थव्यवस्था कहां है, इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि जी-20 इकॉनमी वाले देशों में जीडीपी के मामले में सबसे खराब परफॉर्मेंस भारत की है।
3. लद्दाख में 75 दिन बाद फिर तनातनी
चीन चाहता क्या है? एक तरफ सुलह है, तो दूसरी तरफ सुलगाने वाली हरकतें ... दो दिन पहले चीन ने फिर से पूर्वी लद्दाख के भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की थी। भारतीय जवानों ने इसे नाकाम कर दिया। घुसपैठ को लेकर रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को एक नोट जारी करके बताया है। चीन ने सीमा पर जे-20 फाइटर प्लेन भी तैनात किए हैं।

4. सिर्फ 1 रुपए में छूट गए प्रशांत भूषण
अहं और न्याय के टकराव के बीच, न्यायपालिका के गलियारों का दिलचस्प केस 1 रुपए में सुलट गया…सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट मामले में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण पर सिर्फ एक रुपए का जुर्माना लगाया। भूषण माफी न मांगने पर अड़े थे और कोर्ट माफी न देने पर डटी थी। अब इस फैसले पर कहा जा रहा कि कोर्ट के सामने भूषण की हैसियत 1 रुपए के बराबर ही तो है।
5. सुशांत केस में सीबीआई के 11 दिन
जून से सितंबर आ गया, सुशांत केस जाने कौन सी थ्योरी पर जाकर क्रैक होगा....अब इस मामले में सक्षम कही जाने वाले सीबीआई को भी कुछ सूझ नहीं रहा। सोमवार को इस मामले में सीबीआई जांच 11वां दिन था और रिया को घेरने का चौथा दिन। कुल 35 घंटे की दिल-दिमाग हिला देने वाली पूछताछ के बाद भी अभी सब कुछ उलझा हुआ है। नजर बनी रहेगी कि कौन सी थ्योरी सच साबित होती है।
6. कोरोना LIC का कुछ नहीं बिगाड़ पाया
65वें बर्थडे पर देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC से जुड़ी ये खबर एक टॉकिंग पाइंट है… कोरोना काल के बावजूद आज अपने 64 साल पूरे कर रही इस सरकारी कंपनी पर निवेशकों का भरोसा कायम है और बढ़ भी रहा है। आंकड़े कहते हैं कि 2019-20 में LIC ने 2.19 करोड़ नई पॉलिसी बेची हैं, जो 6 साल में रिकॉर्ड है। क्लेम सेटलमेंट में 159,770.32 करोड़ रुपए का भुगतान किया और 215.98 लाख दावे निपटाए गए।
7. वायरस के लिए एक डोज काफी नहीं
थोड़ा परेशान करने वाली खबर क्योंकि कोरोना की एक वैक्सीन लगवाने से कुछ नहीं होगा… ये बात अमेरिकी विशेषज्ञ कह रहे हैं कि आने वाले दिनों में जब वैक्सीन आएगी तो उसके केवल एक डोज से काम नहीं चलेगा। लोगों को दो डोज की जरूरत पड़ेगी। मौजूदा समय में ही टेस्टिंग किट, पीपीई किट और दूसरी जरूरी चीजों की कमी है। ऐसे में दो बार वैक्सीनेशन का प्रोग्राम चलाना बड़ा मुश्किल होगा।
अब जान लेते हैं कि 1 सितंबर के इतिहास में क्या खास रहा …
- 01 सितंबर 1939 को 15 लाख सैनिकों के साथ हिटलर की जर्मन सेना ने पोलैंड पर हमला बोला था और इसी के साथ शुरू हुआ था दूसरा विश्व युद्ध। इसमें करीब 5 करोड़ लोगों की जान गई थी।
- 1947 में आज ही के दिन इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) अस्तित्व में आया था। हमारा IST इंग्लैंड के ग्रीनविच के स्टैंडर्ड टाइम से साढ़े पांच घंटे आगे है ! मतलब इंग्लैंड में जब दोपहर के 12 बजते हैं, तब भारत में शाम के 5:30 बजे का समय होता है।
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आज ही के दिन 1933 में उत्तरप्रदेश के बिजनौर में मशहूर कवि और गज़ल लेखक दुष्यंत कुमार का जन्म हुआ था। सिर्फ 42 साल की उम्र में बहुत धारदार रचनाओं की विरासत छोड़ दुष्यंत कुमार दुनिया से रुखसत हो गए थे।
- आखिर में दुष्यंत कुमार की गजल ‘ये जो शहतीर है पलकों पे उठा लो यारो’ की चार पंक्तियां जो कहती हैं कि चाहो तो सब संभव है
रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया
इस बहकती हुई दुनिया को संभालो यारो
कैसे आकाश में सुराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो
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from Dainik Bhaskar /national/news/ganapati-visarjan-pranab-mukherjee-passes-away-jee-exam-starts-top-news-and-big-updates-with-dainik-bhaskar-morning-briefing-today-127671329.html
सोमवार, 31 अगस्त 2020
दोषी प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट आज सजा सुनाएगा; 122 लॉ स्टूडेंट्स ने अदालत को इमोशनल चिट्ठी लिखकर कहा- फैसले पर फिर से विचार करें https://bit.ly/34NXx4I
कोर्ट और जजों की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण को सजा सुनाएगा। इससे पहले देशभर के 122 लॉ स्टूडेंट्स ने सीनियर कोर्ट को इमोशनल लेटर लिखा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एसए बोबडे और दूसरे जजों को लिखी चिट्ठी में कहा गया है कि इस मामले में कोर्ट अपने फैसले पर फिर से विचार करे।
'लोगों में भरोसा बहाल कर आलोचना का जवाब दे कोर्ट'
लॉ स्टूडेंट्स ने कहा है कि अदालत को लोगों में भरोसा बहाल कर आलोचना का जवाब देना चाहिए। जब आलोचना पीड़ा से उठे और न्याय की मांग करे, तो कोर्ट को अवमानना का आरोप नहीं लगाना चाहिए। वो भी ऐसे व्यक्ति पर, जो उसी गहराई से न्याय मांग रहा हो, जो वह दूसरों के लिए मांगता रहा है। चिट्ठी में लिखा है कि लंबे समय से प्रशांत भूषण को भ्रष्टाचार के खिलाफ कोर्ट में लड़ते देखा है। कानून और राष्ट्र निर्माण में उन्होंने अच्छा काम किया है।
'दरकिनार किए गए लोगों के लिए था ट्वीट'
लॉ स्टूडेंट्स ने कहा कि जिन दो ट्वीट के आधार पर भूषण को कंटेम्प्ट का दोषी ठहराया गया है, वे ट्वीट उस उस तबके के लोगों की आवाज उठाने के लिए थे, जिनकी अनदेखी की गई। इनसे कोर्ट की पवित्रता को नुकसान नहीं पहुंचता।
प्रशांत भूषण ने माफी मांगने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने महीने की शुरुआत में ही भूषण को उनके अवमानना का दोषी ठहराया था और फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने पिछले हफ्ते भूषण को बिना शर्त माफी मांगने की मौका दिया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था। भूषण ने कहा था माफी मांगी तो यह अंतरात्मा और कोर्ट की अवमानना होगी।
भूषण के इन 2 ट्वीट को कोर्ट ने अवमानना माना
पहला ट्वीट: 27 जून- जब इतिहासकार भारत के बीते 6 सालों को देखते हैं तो पाते हैं कि कैसे बिना इमरजेंसी के देश में लोकतंत्र खत्म किया गया। वे (इतिहासकार) सुप्रीम कोर्ट खासकर 4 पूर्व सीजेआई की भूमिका पर सवाल उठाएंगे।
दूसरा ट्वीट: 29 जून- इसमें वरिष्ठ वकील ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे की हार्ले डेविडसन बाइक के साथ फोटो शेयर की। फोटो में सीजेआई बिना हेलमेट और मास्क के नजर आ रहे थे। भूषण ने लिखा था कि सीजेआई ने लॉकडाउन में अदालतों को बंद कर लोगों को इंसाफ देने से इनकार कर दिया।
भूषण को पहले भी अवमानना का नोटिस दिया गया था
प्रशांत भूषण को नवंबर 2009 में भी सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का नोटिस दिया था। तब उन्होंने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के जजों पर कमेंट किया था।
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from Dainik Bhaskar /national/news/supreme-court-is-scheduled-to-pronounce-sentence-to-lawyer-prashant-bhushan-in-contempt-case-today-127670663.html
मध्यप्रदेश के सिवनी में जिस दिन निर्माण पूरा होना था, उसी दिन बह गया पुल; जालंधर में सोढल बाबा का दरबार सजा, कल शुभारंभ https://bit.ly/34Tbyyl
मध्यप्रदेश में लगातार हो रही बारिश और आसपास की नदियों का पानी नर्मदा में इकट्ठा होने के कारण नर्मदा नदी रौद्र रूप दिखा रही है। रविवार को दिनभर मोरटक्का पुल नर्मदा की बाढ़ में डूबा रहा। वहीं कई जगह निचली बस्तियों में लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें सेना के हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। होशंगाबाद में सड़कों पर नाव चलाना पड़ रही है।
रविवार सुबह 10 बजे हेलीकॉप्टर से ली गई यह भोपाल के नसरुल्लागंज के गांव सातदेव की है। 5000 की आबादी वाला नर्मदा किनारे बसा यह गांव बाढ़ के पानी में घिरकर टापू बन गया है। एनडीआरएफ और सेना ने 80% आबादी को रेस्क्यू कर टीगाली गांव में शिफ्ट कर दिया है।
निचली बस्तियों में भरा पानी

मध्यप्रदेश में लगातार हो रही बारिश से कई नदियां उफान पर हैं। कई जगह निचली बस्तियों में लोग फंस गए हैं। फोटो सीहोर जिले की है जहां पर निचली बस्तियों में पानी भर गया है। ऐसे में लोग अपना सामान समेटने में लगे हुए हैं। इसी दौरान एक छोटी बच्ची अपने भाई को पीठ पर लादकर सुरक्षित स्थान पर ले जा रही है।
24 घंटे में 4 इंच बारिश

24 घंटे में उज्जैन में 4 इंच से अधिक बारिश हुई। एक सप्ताह में दूसरी बार शिप्रा नदी उफान पर आ गई है। इससे रामघाट स्थित कई मंदिर शिप्रा नदी में डूब गए हैं।
उद्घाटन से पहले ही बहा पुल

भारी बारिश के चलते मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में बड़ा नुकसान हुआ है। 2 हजार मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। यहां शुक्रवार शाम को लखनादौन क्षेत्र में बना एक निस्तानी बांध बह गया, जबकि रविवार को भीमगढ़ से सुनवारा के बीच 3.7 करोड़ रुपए की लागत से बना पुल बहाव में गिर गया। इस पुल का अभी उद्घाटन होना था। इसका निर्माण कार्य पूरा करने की डेडलाइन 30 अगस्त 2020 थी, लेकिन इसी दिन यह ढह गया।
बप्पा से बच्ची ने मांगी मन्नत

फोटो हरियाण के हिसार की है। रविवार को गणपति बप्पा का विसर्जन किया जा रहा था इससे पहले छोटी बच्ची ने गजानन के कान में मन्नत मांगी। इस दौरान भक्तों ने गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आना... के जयकारे लगाए।
कोरोना काल में ताजिया

दतिया में मोहर्रम पर मुस्लिम समाज के लोगों ने लाला के ताल पर ताजिए और बुर्राकें विसर्जित कीं। किले के अंदर से लोगों ने ताजिए निकाले। चार-चार लोगों की टोलियां कंधों पर ताजिए लेकर लाला के ताल पर पहुंची। यहां पूजन किया, इसके बाद दो से तीन लोग तालाब में कूदे और ताजिए विसर्जित किए। पहली बार जिले में कहीं भी मोहर्रम पर ताजिए विसर्जन के दौरान डीजे की धुन पर जुलूस, रैली तो दूर हाथ ठेलों पर भी ताजिए रखकर नहीं निकाले गए। न ही कत्ल की रात का जुलूस निकाला गया।
सोशल डिस्टेंसिंग से दर्शन होंगे

हर साल की तरह इस बार भी बाबा सोढल का भव्य दरबार सज चुका है। इस बार अंतर यह है कि दूर-दूर से मेला देखने आने वालों की भीड़ नहीं होगी। श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंस मेनटेन कर बारी-बारी दर्शन करने होंगे। रविवार को झंडे की रस्म अदा की गई। पहली सितंबर को हवन किया जाएगा। इसमें सीमित संख्या में लोग शामिल होंगे। मंदिर कमेटी, निगम और पुलिस प्रशासन ने प्रबंध मुकम्मल कर लिए हैं। खेत्री बीजने वाले 1678 परिवारों के एक-एक मेंबर को खेत्री अर्पण और माथा टेकने की इजाजत दी गई।
बारिश के साथ धूप भी

बारिश के बाद उज्जैन में रविवार दोपहर इंद्रधनुष के रूप में प्रकृति का सतरंगी दर्शन हुआ। बादलों के बीच निकली हल्की धूप ने इंद्रधनुष की खुबसूरती आकाश में बिखेरी। लंबे समय बाद दिखाई दिए इंद्रधनुष को लोगों ने अपने मोबाइल और कैमरों में कैद कर लिया।
लगातार बारिश से बांध ओवरफ्लो

राजस्थान के बांसवाड़ा सहित निकतटवर्ती जिलों में हो रही बारिश के कारण क्षेत्र के बांध ओवरफ्लो हैं। रविवार को माही बांध के 16 गेट खोलने पड़े। साथ ही बारां के 3 बांध व रावतभाटा के गांधीनगर व राणा प्रताप बांध के गेट भी खोलने पड़े। डूंगरपुर में 14 इंच बारिश हुई है। मौसम विभाग ने 24 घंटे भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। फोटो रावतभाटा के गांधीनगर बांध की है।
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from Dainik Bhaskar /local/delhi-ncr/news/on-the-day-construction-was-to-be-completed-in-seoni-of-madhya-pradesh-the-bridge-washed-away-on-the-same-day-the-court-of-sodhal-baba-in-jalandhar-was-decorated-launched-tomorrow-127670606.html
अगर हम गणेश जी के एक-एक अंग को देखें, तो वे हमें सही जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं https://bit.ly/2EFxSRb
कोई भी अच्छा काम शुरू करने से पहले कहते हैं श्रीगणेश करो। मतलब हर कार्य की शुरुआत गणेश की स्थापना से करते हैं। लेकिन क्या सिर्फ उनको याद करना ही काफी है। हम सिर्फ गणेश जी की महिमा ना गाएं, बल्कि खुद ही श्रीगणेश जैसे बन जाएं।
गणेश जी के अगर हम एक-एक अंग को देखें, तो वे हमें सही जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। गणेश जी का मस्तक बड़ा दिखाया जाता है। जो दिव्य और विशाल बुद्धि का प्रतीक है। उनकी आंखें बहुत छोटी दिखाई जाती हैं। मतलब जो दिव्य बुद्धि वाला होगा वो दूरांदेशी होगा। मतलब कर्म करने से पहले उस कर्म के परिणाम के बारे में सोचना।
गणेश जी का छोटा मुंह होना यह बताता है कि हमें कम बोलना है। लेकिन कान बड़े हैं मतलब ज्यादा सुनना और अच्छी बातों को ग्रहण करना है। फिर गणेश जी का एक दांत टूटा हुआ दिखाते हैं। आज हमारे जीवन में दोहरापन है। जहां अहंकार होगा वहां दोहरापन होगा। परमात्मा यही सिखाते हैं कि मैं आत्मा हूं, तुम भी एक आत्मा हो। इससे हमारा विश्व एक परिवार बन जाता है।
जब यह दिव्यता जीवन में आ जाती है तब दोहरापन खत्म हो जाता है। फिर गणेश जी की सूंड दिखाते हैं। उसकी विशेषता है कि वह एक पेड़ भी उखाड़ लेती है तो एक बच्चे को भी प्यार से उठा लेती है। मतलब आत्मा जो दिव्य बन जाएगी, वो बहुत विनम्र होगी, लेकिन बहुत शक्तिशाली भी होगी।
आध्यात्मिकता का मतलब है, जीवन में सम्पूर्ण संतुलन। विनम्र लेकिन बहुत शक्तिशाली। फिर गणेश जी का पेट बड़ा दिखाते हैं। माना जाता है दिव्य आत्मा वह है जो हर बात को अपने पेट में समा ले। जबकि जो सारी बातें सभी से कहते रहते हैं, उनके लिए कहते हैं कि इसके पेट में कोई बात नहीं पचती।
फिर गणेश जी की चार भुजाएं दिखाते हैं। एक भुजा में कुल्हाड़ी है। मतलब परमात्मा से मिली ज्ञान की कुल्हाड़ी, जिससे अपनी बुराईयां, नकारात्मकता को काटना है। दूसरे हाथ में रस्सी है। जो यह बताती है कि सही सोच, सही बोल, सही कर्म, सही खान-पान, सही धन कमाने का तरीका, इन्हें मर्यादाओं की रस्सी से बांध लो।
फिर तीसरे हाथ को आशीर्वाद देते हुए दिखाते हैं। जो यह बताता है कि हमारा हाथ सदैव देने की मुद्रा में होना चाहिए। मतलब कोई भी आत्मा आए, उसका कैसा भी व्यवहार हो हमारे मन में उनके लिए सिर्फ शुभकामना के संकल्प ही आएं।
फिर चौथे हाथ में मोदक है। लेकिन गणेश जी उसको खाते नहीं हैं हाथ में रखते हैं। इसका मतलब है सफलता मिलेगी लेकिन महिमा को स्वीकार नहीं करना है। अहंकार नहीं करना है। सफलता को सिर्फ हाथ में ही रखना है। फिर गणेश जी को बैठा हुआ दिखाते हैं। जिसमें एक पैर मुड़ा हुआ होता है और एक पैर नीचे होता है। जो पांव नीचे होता है उसका भी सिर्फ अंगूठा नीचे छूता है।
मतलब इस दुनिया में रहना है तो पांव नीचे। हमें सबकुछ करना है, सारे रिश्ते निभाने हैं, कारोबार करना है लेकिन सबसे डिटैच भी रहना है। किसी के संस्कार के प्रभाव में आकर मूल्यों को नहीं छोड़ना है।
श्रीगणेश का वाहन चूहा दिखाते हैं। हम देखें तो चूहा सारा दिन कुछ न कुछ कुतरता रहता है। ये हमारी कर्म इंद्रियों का प्रतीक है। सारा दिन कुछ भी देख रहे हैं, सुन रहे हैं, कुछ भी खा रहे हैं, नहीं भी जरूरत है तो पीते जा रहे हैं। दूसरा, चूहा छोटी-सी जगह से अंदर घुस जाता है। उसी तरह हमारे जीवन में बुराईयां, खिंचाव, कमजोरियां, पता ही नहीं चलता है कि कब आ जाती हैं। दर्द तो बहुत बाद में होता है।
आज हम सब जीवन में बड़ी मेहनत कर रहे हैं। खुशी, स्वास्थ्य, रिश्तों और काम के लिए। हमें अपने लिए समय ही नहीं मिलता है मतलब हम अपनी दुनिया को ही नहीं संभाल पा रहे हैं। लेकिन जिसका संबंध परमात्मा के साथ होगा उसकी हर सोच शुद्ध, हर शब्द सही होगी। तो गणेश जी हमें जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। जो आत्मा ये सब कुछ कर लेती है उसको विघ्नविनाशक कहते हैं। हम सबको विघ्नविनाशक आत्मा बनना है। सबके दुःख हरके इस सृष्टि पर सुख लाना है।
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बच्चे पैंगोंग झील के पास बेखौफ घूम रहे, पर्यटकों के लिए भी खुल गया फिंगर-4 के नजदीक का यह गांव, लोग बोले- अब सब नॉर्मल https://bit.ly/3jsANvd
(मोरुप स्टैनजिन) चीन के साथ जारी तनाव के बीच लद्दाख के आखिरी रहवासी गांव मान-मेराक में अब जिंदगी पहले जैसी हो गई है। सभी प्रकार की पाबंदियां हटा ली गई हैं। संचार व्यवस्था बहाल हो गई है और पर्यटकों के लिए भी अब कोई रोक-टोक नहीं है। 2 महीने पहले यहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं।
तनाव के गवाह रहे फिंगर-4 इलाके के पास स्थित पैंगोंग झील अब फिर से बच्चों और स्थानीय लोगों से गुलजार है। यहां आसपास के लोगों से बात करो तो कहते हैं- इंडियन आर्मी ने चीनियों को पीछे खदेड़ दिया है। अब डरने जैसी कोई बात नहीं है।
'सर्दियों में लोग पहले की तरह अपने मवेशी फिंगर फोर तक ले जा सकेंगे'
एरिया काउंसलर (स्थानीय जनप्रतिनिधि) स्टैनजिन कॉनचॉक के मुताबिक, 15-16 जून गलवान घाटी की घटना के 2 महीने बाद तक यहां के लोगों ने सेना की सख्त पहरेदारी में जिंदगी गुजारी है। लेकिन, अब जीवन सामान्य हो रहा है। सेना और स्थानीय लोग मिलकर सड़क और भवनों के निर्माण में युद्धस्तर पर लगे हुए हैं क्योंकि सर्दियां शुरू होते ही काम करने में दिक्कत आएगी।
स्टैनजिन ने बताया, हमने नोटिस किया है कि चीनी पीछे हट रहे हैं। इंडियन आर्मी इलाके में नियमित रूप से पेट्रोलिंग कर रही है। गांव मान-मेरक की सरपंच देचेन डोलकर कहती हैं कि अब यहां सबकुछ नॉर्मल है। मुझे उम्मीद है कि आने वाली सर्दियों में लोग पहले की तरह अपने मवेशी फिंगर फोर तक ले जा सकेंगे।
'यहां सबकुछ पहले जैसा है, लोग अपने काम में व्यस्त हैं'
इलाके की पूर्व काउंसलर और चुशुल निवासी सोनम सेरिंग कहती हैं कि स्थानीय लोगों में यह मजबूत धारणा है कि सर्दी शुरू होने पर चीन फिर अपनी हरकत पर उतर सकता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच नई झड़प हो सकती है। हालांकि, हम इंडियन आर्मी की मौजूदगी से सुरक्षित महसूस भी कर रहे हैं।
पैंगोंग झील के पास रहने वाले ताशी मोतुप बताते हैं कि जब चीनी फिंगर फोर पर दाखिल हुए, तो हम सब बुरी तरह से घबरा गए थे। गलवान की घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और बेचैनी थी। लेकिन, अब यहां सबकुछ पहले जैसा है। हम लोग अपने काम में व्यस्त हैं।
गलवान के बाद 245 करोड़ का बजट जारी
गलवान की घटना के बाद इस गांव के आसपास तेजी से सड़कों और भवनों का निर्माण हो रहा है। लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर आर के माथुर ने 129 करोड़ का चांगथांग पैकेज जारी किया है। स्पेशल डेवलपमेंट के लिए अतिरिक्त 91.97 करोड़ का फंड निकाला गया है। बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए 23 करोड़ रुपए जारी किए गए। शुक्रवार को कुल मिलाकर इस क्षेत्र के लिए 245 करोड़ का बजट जारी किया गया है।
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कश्मीर में आठ महीने में तनाव से जूझ रहे 18 जवानों ने की खुदकुशी, पिछले साल से बढ़े आंकड़े, छह जवानों की साथी ने ही उन्मादी हमला कर जान ली https://bit.ly/3gEZHWR
(मुदस्सिर कुल्लू) कश्मीर में सुरक्षाबलों में खुदकुशी और अपने ही साथी की हत्या कर देने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस साल के शुरुआती 8 महीने में कश्मीर में 18 जवानों ने आत्महत्या की है। जबकि 6 जवान अपने ही साथी के उन्मादी हमले में मारे गए हैं। सेना, पैरामिलिट्री फोर्स के सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि पिछले पूरे साल में कश्मीर में 19 जवानों ने आत्महत्या की थी। जबकि इस बार आत्महत्या के आंकड़े 8 महीने में ही करीब बराबरी पर आ गए। इन मामलों का कारण यह है कि सुरक्षाकर्मियों को जरूरत से ज्यादा दैनिक ड्यूटी करनी पड़ रही है। वे परिवार से लंबे समय तक दूर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में वे तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं।
वे जवान ज्यादा परेशान हैं जो सीधे तौर पर आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात हैं। कई बार उनका धैर्य टूट जाता है।
कोरोना का डरः मई में एक ही दिन में सीआरपीएफ के एसआई और एएसआई ने खुदकुशी कर ली
इस साल आत्महत्याओं का एक बड़ा कारण कोरोना संकट भी बताया जा रहा है। खासकर सीआरपीएफ के दो मामलों में यह बात खुलकर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, 12 मई को अनंतनाग जिले के अक्रुर्ण मट्टन क्षेत्र में सीआरपीएफ के एक सब इंस्पेक्टर ने अपनी सर्विस राइफल से गोली मारकर खुदकशी कर ली थी।
सब इंस्पेक्टर ने सुसाइड नोट में लिखा था, ‘मैं डरा हुआ हूं। मैं कोरोना पॉजिटिव हो सकता हूं। बेहतर है मर जाऊं।’ उसी दिन श्रीनगर के करण नगर इलाके में सीआरपीएफ के एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर ने भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। यह मामला भी कोरोना के डर से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे अन्य मामले भी होने की आशंका है।
उपाय: जवानों के लिए काउंसिलिंग सेशन, मानसिक व्यायाम को बढ़ावा
श्रीनगर में सीआरपीएफ के जनसंपर्क अधिकारी पंकज सिंह ने बताया कि जवानों को तनाव मुक्त करने के लिए लगातार काउंसलिंग सेशन चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा सुबह के व्यायाम में उन गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे मानसिक स्वास्थ्य को फायदा हो। दूसरी ओर एक अधिकारी ने कहा कि शीर्ष अधिकारी ऐसी व्यवस्था करें कि उनके साथी लंबे समय तक परिवार से दूर रहने को मजबूर न हों। वे परिवार के साथ पर्याप्त समय बिता सकें।
दावा: विशेषज्ञ बोले- पारिवारिक समस्याएं आत्महत्या का बड़ा कारण
कश्मीर के मनोचिकित्सक डॉ. यासिर हसन राथर का कहना है कि हर महीने उनके पास कई जवान मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए आते हैं। वे बताते हैं कि कैसे वे कड़ी कार्य संस्कृति से परेशान हैं। उन्हें कई बार जरूरी काम के लिए भी वक्त नहीं मिल पाता।
मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार वसीम राशिद का कहना है कि जवान लंबे समय तक पारिवारिक समस्याओं को हल नहीं कर पाने के कारण तनाव में रहते हैं। ऐसे में वे कभी-कभी आत्महत्या का रास्ता अपना लेते हैं।
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1,250 मंदिरों का संचालन करने वाले त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड को 300 करोड़ का नुकसान, अब बोर्ड अपने सोने को नकद में बदलेगा https://bit.ly/3bac0cs
(केपी सेतुनाथ). केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर का संचालन करने वाला त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड तंगहाली दूर करने के लिए अपने सोने को नगदी में बदलने जा रहा है। वहीं, तिरुमाला देवस्थानम बोर्ड जम्मू में भव्य वेंकटेश्वर मंदिर बनाने जा रहा है।
त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड भारतीय रिजर्व बैंक की स्वर्ण बांड योजना में शामिल होगा ताकि बोर्ड के देशभर मेें 1,250 मंदिरों का रख-रखाव और उसका संचालन सही तरीके से हो सके। योजना के तहत बोर्ड को जमा किए गए सोने के एवज में 2.5% वार्षिक ब्याज मिलेगा।
फिलहाल बोर्ड सोने की मात्रा का आकलन कर रहा है
त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड के अध्यक्ष एन वासु ने बताया कि इसके लिए केरल हाईकोर्ट से मंजूरी मांगी गई है। फिलहाल बोर्ड सोने की मात्रा का आकलन कर रहा है। हमें उम्मीद है कि एक महीने में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और योजना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। कोरोना महामारी के चलते मंदिर बंद होने के कारण बोर्ड को करीब 300 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।
अब यहां श्रद्धालुओं का सीमित संख्या में जुटना शुरू हो गया है
मंदिरों के पास पूजा और अनुष्ठानों के लिए प्राचीन और विरासती जेवर हैं, उन्हें इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, बोर्ड के सभी मंदिरों को पांच माह बाद श्रद्धालुओं के लिए 17 अगस्त को खोल दिया गया है। अब यहां श्रद्धालुओं का सीमित संख्या में जुटना शुरू हो गया है।
फिलहाल 3,500 कर्मचारियों को वेतन देने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है
वासु ने कहा कि बोर्ड के पास मौजूद कुल सोने की मात्रा बता पाना अभी संभव नहीं है, क्योंकि आकलन प्रक्रिया जारी है। संभावना है कि कम से कम 1,000 किग्रा सोना तो होगा ही। बोर्ड 1,250 मंदिरों का संचालन करता है और फिलहाल 3,500 कर्मचारियों को वेतन देने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
सिर्फ 100 मंदिर ही ऐसे हैं, जिनसे अच्छी आवक होती है जबकि शेष मंदिरों का संचालन इन्हीं 100 मंदिरों को मिले दान पर निर्भर होता है। बोर्ड को सबरीमाला मंदिर से ही सबसे ज्यादा चढ़ावा मिलता है। साल 2019-20 में मंदिर ने तीर्थयात्रा सीजन में 263.57 करोड़ रुपए कमाए थे, जबकि 2018-19 में 179.23 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी।
100 एकड़ में बनेगा तिरुपति बालाजी मंदिर, अस्पताल और वैदिक स्कूल भी
इधर, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड जम्मू-कटरा हाईवे पर भव्य वेंकटेश्वर मंदिर बनाने जा रहा है। इसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाईवे पर करीब 100 एकड़ जमीन देने पर सहमति जता दी है। बोर्ड के चेयरमैन वायवी सुब्बा रेड्डी ने बताया कि इस मंदिर के बनने से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए हर वर्ष आने वाले लाखों श्रद्धालु वेंकटेश्वर भगवान के भी दर्शन कर सकेंगे। बोर्ड जम्मू में मंदिर के अलावा अस्पताल, वैदिक पाठशाला और शादी गृह का भी निर्माण करेगा।
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एयरपोर्ट-विमानों में 4600 से ज्यादा कीमती चीजें भूले यात्री; दूल्हे के जूते, कुकर, आर्मी यूनिफॉर्म तक शामिल https://bit.ly/2Dhe06i
हवाई सफर करने वाले यात्री देशभर के एयरपोर्ट्स और विमानों में 4600 से ज्यादा करोड़ों रुपए का सामान छोड़कर भूल गए और लेने नहीं पहुंचे। अब तक एयरपोर्ट पर मिलने वाले सामानों में दूल्हे के जूते, वाइन की बोतल, प्रेशर कुकर, आर्मी यूनिफॉर्म और हथकड़ी सबसे यूनिक हैं। यह सामान एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के खोया-पाया विभाग में पड़ा है।
एएआई ने रिपोर्ट जारी कर इस बात की जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर 4689 सामान मिले हैं। यात्री एक जनवरी से अब तक यह सामान भूले हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि करीब 5 माह से देश में फ्लाइट्स का संचालन नहीं हुआ। इस कारण ज्यादातर सामान विदेशों से भारतीय लोगों को लाने वाली फ्लाइट्स में मिला। कोलकाता एयरपोर्ट के स्टाफ को लेदर जैकेट मिले।
गुवाहाटी के एयरपोर्ट पर आर्मी यूनिफॉर्म और सर्जिकल गाउन मिली
भुवनेश्वर में स्टाफ को दूल्हे के जूते मिले। चेन्नई एयरपोर्ट पर गिटार, सिगरेट, लेजर लाइट और हथकड़ी मिली। गुवाहाटी के एयरपोर्ट पर आर्मी यूनिफॉर्म और सर्जिकल गाउन मिली। सबसे ज्यादा पाए जाने वाले सामानों में मोबाइल, पावर बैंक, लैपटॉप, इयरफोन, कलाई घड़ी, ट्रिमर, पर्स, अंगूठी, पायल, बैडमिंटन, स्लीपिंग बैग और कार की चाबी जैसी चीजें शामिल हैं।
गाइडलाइन के मुताबिक 90 दिन में सामान की नीलामी होती है
एएआई की रिपोर्ट के मुताबिक, खराब हो जाने वाले सामानों के लिए 48 घंटे तक इंतजार किया जाता है। फिर उसका निस्तारण कर दिया जाता है। लेकिन बाकी सामानों के लिए 90 दिन तक इंतजार किया जाता है। यदि निश्चित समय में सामान का मालिक कोई क्लेम नहीं करता है तो उसकी नीलामी कर दी जाती है।
हालांकि, खोए हुए सामान पर दावा करने के लिए बोर्डिंग पास की कॉपी या यात्रा का सबूत जरूरी है। साथ ही जिस सामान पर दावा किया जा रहा है, उसकी जानकारी देनी होती है।
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इस्काॅन का कुरुक्षेत्र में बन रहा है 200 करोड़ रुपए से रथ रूपी भव्य कृष्ण-अर्जुन मंदिर, इंडोनेशिया से आएंगे 34 फीट ऊंचे घोड़े https://bit.ly/3jrI9PG
धर्मनगरी में बन रहे इस्कॉन के भव्य कृष्ण-अर्जुन मंदिर में घोड़े अब चीन से नहीं आएंगे। चीन की बजाए अब इंडोनेशिया में मार्बल के घोड़े तैयार कराए जाएंगे। यही घोड़े रथ रूपी कृष्ण-अर्जुन मंदिर में लगेंगे। पहले चीन में चार घोड़ों को तैयार कराने की योजना थी। इसे लेकर फैसला भी हो चुका था, लेकिन अब देश में चीन विरोधी लहर चल रही है। इस्काॅन ने भी चीन के विरोधस्वरूप वहां घोड़े तैयार करने की योजना रद्द कर दी है। इस्कान कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपालदास महाराज के मुताबिक काफी सोच-विचार के बाद यह निर्णय लिया है। मंदिर 2022 के अंत तक तैयार होगा। अभी इसका 60 प्रतिशत निर्माण हो चुका है।
ग्लोरी ऑफ कुरुक्षेत्र, 165 फुट ऊंचा मंदिर
पिहोवा-कुरुक्षेत्र मार्ग पर ज्योतिसर के पास इस्काॅन ग्लोरी ऑफ कुरुक्षेत्र इस्काॅन वैदिक कल्चर प्रोजेक्ट के तहत भव्य मंदिर का निर्माण कर रहा है। पहले यह मंदिर गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर में ही बनना था, लेकिन जमीन विवाद के चलते बाद में सरकार ने पिहोवा रोड पर ज्योतिसर से कुछ दूरी पर हिरमी की जगह में से 6 एकड़ जमीन मुहैया कराई। 6 एकड़ में मंदिर परिसर होगा। इसमें से 23,000 स्क्वायर फीट में मुख्य मंदिर का ढांचा होगा। करीब 165 फुट ऊंचा मंदिर बनेगा। इसपर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च आएगा।
यहीं है विश्व का भव्य कृष्ण-अर्जुन कांस्य रथ
कुरुक्षेत्र में कई भव्य मंदिर बन रहे हैं। इनमें गीता ज्ञान मंदिर 18 मंजिला होगा। तिरुपति बालाजी की तर्ज पर भव्य मंदिर बन चुका है। वहीं 5 एकड़ में भारत माता मंदिर भी बनेगा। कुरुक्षेत्र में ही विश्व की सबसे भव्य श्रीकृष्ण-अर्जुन कांस्य रथ भी है। रथ का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार रामसुतार ने किया था। इस पर ढाई करोड़ रुपए लागत आई थी। यह रथ बेस सहित करीब 20 फीट ऊंचा है।
41 फीट लंबे होंगे घोड़े
इस्काॅन यूथ फोरम कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर गोविंद कृष्ण दास के मुताबिक इंडोनेशिया से आकर्षक चार घोड़े तैयार होंगे जो रथ रूपी मंदिर में फ्रंट की तरफ लगने हैं। एक घोड़े की लंबाई 41 फीट होगी और ऊंचाई करीब 34 फीट होगी। एक घोड़े की अनुमानित लागत करीब 80 से 90 लाख रुपए है। मंदिर व गेस्ट हाउस आदि पर अनुमानित 200 करोड़ रुपए लागत आएगी। अगले साल ये घोड़े तैयार हो जाएंगे।
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यहां 6 महीने लॉकडाउन रहता है, ताकि घरों में नमी न पहुंचे, बारिश की तेज आवाज से बचने के लिए छतों को बनाते हैं साउंडप्रूफ https://bit.ly/2YM2RSg
(पनजुबम चिंगखेइंगबा) मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से 65 किमी दूर ईस्ट खासी हिल की पहाड़ियों के बीच छोटा-सा गांव मासिनराम बसा है। यहां सालाना 11,872 मिमी बारिश होती है, जो दुनिया में किसी एक जगह पर होने वाली सर्वाधिक बारिश है।
प्रकृति के बीच उसी के संसाधनों के साथ कैसे जीवन जिया जाता है, मासिनराम के लोग इसकी एक मिसाल हैं। गांव के मुखिया लसबोर्न शांगलिंग बताते हैं कि लगभग हर मौसम में यह इलाका बादलों से घिरा रहता है। मई से अक्टूबर के बीच ऐसे कई मौके आते हैं जब लगातार 9 दिन, 9 रात तक बारिश होती है।
महीनों सूर्य के दर्शन नहीं होते
महीने गुजर जाते हैं जब सूर्य देवता के दर्शन नहीं होते। स्कूल टीचर एनआर रापसान्ग बताते हैं कि मई से अक्टूबर तक हमें स्कूल बंद करना पड़ता है। छात्र अगर आते भी हैं, पूरी तरह भीग चुके होते हैं। बावजूद इसके हम कोर्स हर साल समय पर ही खत्म करते हैं।
यहां सबसे बड़ी चुनौती है घर में बारिश और उससे होने वाली नमी रोकना। इसके लिए खिड़की, दरवाजे और सभी झरोखे पूरी तरह से बंद करने पड़ते हैं। एक छोटी सी लापरवाही पूरे घर और उसमें रखे सामान को भिगो देती है। दिन में तीन से चार बार कपड़े हीटर की मदद से सुखाने पड़ते हैं।
छतों पर मोटी घास की परत बिछाते थे
गांव के महासचिव दोहलिंग बताते हैं कि कुछ साल पहले तक लोग मूसलाधार बारिश की आवाज से बचने के लिए छतों पर मोटी घास की परत बिछाते थे। लेकिन अब ये बातें पुरानी हो गई हैं। इनकी जगह नई तकनीक ने ले ली है। सरपंच लसबोर्न बताते हैं कि यहां 1000 परिवार हैं, जिनमें ज्यादातर खासी जनजाति के हैं।
कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा, तो गांव के लोगों को घर में रहने में बिल्कुल भी झिझक नहीं हुई। मई से अक्टूबर तक पुरखों के समय से लॉकडाउन की प्रैक्टिस चली आ रही है। इस दौरान लोग तभी घरों से निकलते हैं, जब बहुत जरूरी काम होता है।
इस नियम का कड़ाई से पालन होता है। सभी लोग घरों में ही रहकर कैरम, कार्ड जैसे गेम खेलकर अपना समय बिताते हैं। घर के बुजुर्ग बच्चों को रीति-रिवाज और किस्से-कहानियां सुनाते हैं। तमाम चुनौतियों के बावजूद यह समय बहुत मीठी यादें लेकर भी आता है।
बांस की तिकोनी टोपी पहनावा बन गया है
गांव की खास पहचान बारिश से बचने के लिए बांस से बनी एक विशेष तरह की टोपी है। स्थानीय भाषा में इसे क्नूप कहते हैं। लोग तेज बारिश में भी इसकी मदद से तमाम काम आराम से करते हैं।
दुनिया की सबसे लंबी गुफा भी यहीं मिली
2016 में गांव में दुनिया की सबसे बड़ी बलुआ पत्थर की गुफा भी खोजी गई। इसे क्रेमपुरी कहा जाता है। यह 24, 583 मीटर लंबी है। दूसरे पायदान पर वेनेजुएला की गुफा है।
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यहां 6 महीने लॉकडाउन रहता है, ताकि घरों में नमी न पहुंचे, बारिश की तेज आवाज से बचने के लिए छतों को बनाते हैं साउंडप्रूफ https://bit.ly/31G0odZ
(पनजुबम चिंगखेइंगबा) मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से 65 किमी दूर ईस्ट खासी हिल की पहाड़ियों के बीच छोटा-सा गांव मासिनराम बसा है। यहां सालाना 11,872 मिमी बारिश होती है, जो दुनिया में किसी एक जगह पर होने वाली सर्वाधिक बारिश है।
प्रकृति के बीच उसी के संसाधनों के साथ कैसे जीवन जिया जाता है, मासिनराम के लोग इसकी एक मिसाल हैं। गांव के मुखिया लसबोर्न शांगलिंग बताते हैं कि लगभग हर मौसम में यह इलाका बादलों से घिरा रहता है। मई से अक्टूबर के बीच ऐसे कई मौके आते हैं जब लगातार 9 दिन, 9 रात तक बारिश होती है।
महीनों सूर्य के दर्शन नहीं होते
महीने गुजर जाते हैं जब सूर्य देवता के दर्शन नहीं होते। स्कूल टीचर एनआर रापसान्ग बताते हैं कि मई से अक्टूबर तक हमें स्कूल बंद करना पड़ता है। छात्र अगर आते भी हैं, पूरी तरह भीग चुके होते हैं। बावजूद इसके हम कोर्स हर साल समय पर ही खत्म करते हैं।
यहां सबसे बड़ी चुनौती है घर में बारिश और उससे होने वाली नमी रोकना। इसके लिए खिड़की, दरवाजे और सभी झरोखे पूरी तरह से बंद करने पड़ते हैं। एक छोटी सी लापरवाही पूरे घर और उसमें रखे सामान को भिगो देती है। दिन में तीन से चार बार कपड़े हीटर की मदद से सुखाने पड़ते हैं।
छतों पर मोटी घास की परत बिछाते थे
गांव के महासचिव दोहलिंग बताते हैं कि कुछ साल पहले तक लोग मूसलाधार बारिश की आवाज से बचने के लिए छतों पर मोटी घास की परत बिछाते थे। लेकिन अब ये बातें पुरानी हो गई हैं। इनकी जगह नई तकनीक ने ले ली है। सरपंच लसबोर्न बताते हैं कि यहां 1000 परिवार हैं, जिनमें ज्यादातर खासी जनजाति के हैं।
कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा, तो गांव के लोगों को घर में रहने में बिल्कुल भी झिझक नहीं हुई। मई से अक्टूबर तक पुरखों के समय से लॉकडाउन की प्रैक्टिस चली आ रही है। इस दौरान लोग तभी घरों से निकलते हैं, जब बहुत जरूरी काम होता है।
इस नियम का कड़ाई से पालन होता है। सभी लोग घरों में ही रहकर कैरम, कार्ड जैसे गेम खेलकर अपना समय बिताते हैं। घर के बुजुर्ग बच्चों को रीति-रिवाज और किस्से-कहानियां सुनाते हैं। तमाम चुनौतियों के बावजूद यह समय बहुत मीठी यादें लेकर भी आता है।
बांस की तिकोनी टोपी पहनावा बन गया है
गांव की खास पहचान बारिश से बचने के लिए बांस से बनी एक विशेष तरह की टोपी है। स्थानीय भाषा में इसे क्नूप कहते हैं। लोग तेज बारिश में भी इसकी मदद से तमाम काम आराम से करते हैं।
दुनिया की सबसे लंबी गुफा भी यहीं मिली
2016 में गांव में दुनिया की सबसे बड़ी बलुआ पत्थर की गुफा भी खोजी गई। इसे क्रेमपुरी कहा जाता है। यह 24, 583 मीटर लंबी है। दूसरे पायदान पर वेनेजुएला की गुफा है।
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इस्काॅन का कुरुक्षेत्र में बन रहा है 200 करोड़ रुपए से रथ रूपी भव्य कृष्ण-अर्जुन मंदिर, इंडोनेशिया से आएंगे 34 फीट ऊंचे घोड़े https://bit.ly/2EFmQeK
धर्मनगरी में बन रहे इस्कॉन के भव्य कृष्ण-अर्जुन मंदिर में घोड़े अब चीन से नहीं आएंगे। चीन की बजाए अब इंडोनेशिया में मार्बल के घोड़े तैयार कराए जाएंगे। यही घोड़े रथ रूपी कृष्ण-अर्जुन मंदिर में लगेंगे। पहले चीन में चार घोड़ों को तैयार कराने की योजना थी। इसे लेकर फैसला भी हो चुका था, लेकिन अब देश में चीन विरोधी लहर चल रही है। इस्काॅन ने भी चीन के विरोधस्वरूप वहां घोड़े तैयार करने की योजना रद्द कर दी है। इस्कान कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपालदास महाराज के मुताबिक काफी सोच-विचार के बाद यह निर्णय लिया है। मंदिर 2022 के अंत तक तैयार होगा। अभी इसका 60 प्रतिशत निर्माण हो चुका है।
ग्लोरी ऑफ कुरुक्षेत्र, 165 फुट ऊंचा मंदिर
पिहोवा-कुरुक्षेत्र मार्ग पर ज्योतिसर के पास इस्काॅन ग्लोरी ऑफ कुरुक्षेत्र इस्काॅन वैदिक कल्चर प्रोजेक्ट के तहत भव्य मंदिर का निर्माण कर रहा है। पहले यह मंदिर गीता उपदेश स्थली ज्योतिसर में ही बनना था, लेकिन जमीन विवाद के चलते बाद में सरकार ने पिहोवा रोड पर ज्योतिसर से कुछ दूरी पर हिरमी की जगह में से 6 एकड़ जमीन मुहैया कराई। 6 एकड़ में मंदिर परिसर होगा। इसमें से 23,000 स्क्वायर फीट में मुख्य मंदिर का ढांचा होगा। करीब 165 फुट ऊंचा मंदिर बनेगा। इसपर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च आएगा।
यहीं है विश्व का भव्य कृष्ण-अर्जुन कांस्य रथ
कुरुक्षेत्र में कई भव्य मंदिर बन रहे हैं। इनमें गीता ज्ञान मंदिर 18 मंजिला होगा। तिरुपति बालाजी की तर्ज पर भव्य मंदिर बन चुका है। वहीं 5 एकड़ में भारत माता मंदिर भी बनेगा। कुरुक्षेत्र में ही विश्व की सबसे भव्य श्रीकृष्ण-अर्जुन कांस्य रथ भी है। रथ का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार रामसुतार ने किया था। इस पर ढाई करोड़ रुपए लागत आई थी। यह रथ बेस सहित करीब 20 फीट ऊंचा है।
41 फीट लंबे होंगे घोड़े
इस्काॅन यूथ फोरम कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर गोविंद कृष्ण दास के मुताबिक इंडोनेशिया से आकर्षक चार घोड़े तैयार होंगे जो रथ रूपी मंदिर में फ्रंट की तरफ लगने हैं। एक घोड़े की लंबाई 41 फीट होगी और ऊंचाई करीब 34 फीट होगी। एक घोड़े की अनुमानित लागत करीब 80 से 90 लाख रुपए है। मंदिर व गेस्ट हाउस आदि पर अनुमानित 200 करोड़ रुपए लागत आएगी। अगले साल ये घोड़े तैयार हो जाएंगे।
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